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कटघोरा: अंगद का पैर” बने SDO संजय त्रिपाठी: जनप्रतिनिधियों के इर्द-गिर्द सक्रियता पर उठे गंभीर सवाल, कटघोरा वनमण्डल में बढ़ता विवाद

जनप्रतिनिधियों के इर्द-गिर्द सक्रियता पर उठे बड़े सवाल

कोरबा (छत्तीसगढ़)। कटघोरा वनमण्डल में पदस्थ SDO संजय त्रिपाठी को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। करीब 3.5 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रहने के साथ-साथ अब उनकी कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के साथ नजदीकियों को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरा मामला अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वन विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बनता जा रहा है।

“अंगद का पैर” बनी पदस्थापना, नियमों पर उठे सवाल

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सरकारी सेवा नियमों के अनुसार अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण आवश्यक होता है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी प्रकार के प्रभाव या दबाव से बचा जा सके। लेकिन SDO संजय त्रिपाठी का लगातार 3.5 वर्षों तक एक ही पद पर बने रहना अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। स्थानीय लोग इसे “अंगद का पैर” की स्थिति बता रहे हैं, जहां बदलाव की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही।

जनप्रतिनिधियों के इर्द-गिर्द सक्रियता पर उठे बड़े सवाल

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सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि SDO संजय त्रिपाठी लगातार जनप्रतिनिधियों के आसपास सक्रिय रहते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी यह सक्रियता सिर्फ प्रशासनिक समन्वय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे उद्देश्य यह भी हो सकता है कि उनके खिलाफ संभावित शिकायतें या घोटालों से जुड़ी बातें उच्च स्तर तक न पहुंचें। हालांकि इस तरह के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से यह चर्चा व्यापक स्तर पर फैल रही है, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

घोटालों की आशंका ने बढ़ाई चिंता

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वन विभाग के अंतर्गत चल रहे विभिन्न कार्यों—जैसे वृक्षारोपण, निर्माण कार्य और अन्य योजनाओं—में अनियमितताओं की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन चर्चाओं ने यह संकेत दिया है कि विभागीय स्तर पर कहीं न कहीं निगरानी और जवाबदेही की कमी है।

–जांच की मांग हुई तेज

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट की जाए, और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए

—प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाए संदेह

अब तक प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी लोगों के बीच संदेह को और गहरा कर रही है और यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

एक पदस्थापना से उठे बड़े सवाल

SDO संजय त्रिपाठी का 3.5 वर्षों से एक ही स्थान पर बने रहना और जनप्रतिनिधियों के साथ उनकी सक्रियता अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है—क्या निष्पक्ष जांच होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह चर्चाओं तक सीमित रह जाता है।

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